Poetry

तुम्हारी पसंद नापसंद

याद है तुम्हारी पसंद नापसंद अब भी,
थोड़ा तीखा कम, और मीठा ज़्यादा।

किताबें बहुत सी होंगी आस पास,
बस हिसाब किताब ही नहीं होगा लिखा।
याद हैं तुम्हारी पसंद नापसंद अब तक,
खर्चा बहुत, हिसाब कम।
लसुन थोड़ा ज्यादा, नमक बस संभाल कर।

सावन का इंतज़ार, और
झपाक खिड़की का बंद होने की आवाज़,
याद हैं तुम्हारी पसंद नापसंद सभी,
गीले बालों को सुलझाना, उलझने बढ़ाना,
एलाइची वाली चाय, और देर तक उबाली।

देर शाम का आना, और सुबह जल्दी होना,
इत्तेफाकन नज़रे मिलना, यूँही फ़ेर लेना,
ईथर उथर की बातें होंगी, और
मुलाकातों से बचते जाना।
याद हैं तुम्हारी पसंद नापसंद की अदा,
दूर से नज़रे मिलना, पास से ही गुजर जाना,
थोड़ा तीखा कम, मीठा तेज रखना।

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Poetry

Fragrance of Wet Hair

The fragrance under the wet hair of yours,
Could I barely leave that all alone.
Accompanied all the way with me but,
When it rained it reminded of You walking along my soul.

Shivers like those glittering stars
All above those somewhere in the darkness you hold,
Wait for the longer fleets to close all the distance,
When covered that the remains of You still walk in Me.

Hold me with what you couldn’t have,
Hardly when stairs keep falling out of the way,
The tenacious grip of you within keeps me walking,
When I dare not take step,
When it rained it reminded of you walking along my soul.

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