Poetry

ये भी कोई बात हुई

चाय, सिगरेट और बारिश,
ये तो कोई बात न हुई।
तन्हाई भरी रात और तुम्हारी याद,
ये तो कोई मुलाकात न हुई।

वही गली, शहर, और घर की खिड़की,
वही पनवाड़ी, वही सिगरेट और इंतज़ार,
ये सब ठीक तो नहीं,
ये भी कोई बात हुई,
आए नहीं तुम बारिश को झाँकने खिड़की से,
मिली नहीं तुमसे फ़िर मेरी नज़रे,
ऐसे ही वापस लौट जाना होगा अपने शहर,
ये भी कोई मुलाकात हुई।

चाय, सिगरेट और बारिश,
ये तो कोई बात न हुई।

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Poetry

पिछली बारिश

याद हैं,
पिछली बारिश में,
एक छतरी के निचे,
आधे भीगे तुम थे,
आधा भीगा मैं था,
और जैसे ही गरज कर
बादलो ने थोड़ी बिजली भड़काई,
तुमने लिपट कर
बता दिया था के
कितने भीगे हुए तुम थे|
आज वो बारिश फिर हो रही हैं|
ये बादल पर नए हैं,
ये मिटटी की महक भी नयी हैं,
ये रात भी आज नयी हैं,
फासले भी बढ़ गए हैं,
फिर क्यूँ बारिश वही हैं?
फ़िलहाल एक छाते के साथ
मैं उसी चाय की दूकान पे हूँ,
शायद तुम्हे याद हो वो भीगना|

 

 

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