Poetry

मोड़

वो मोड़ याद होगा तुम्हें,
वही जहाँ रात भर
नींद यूँही बैठी रहती थी
और तुम और मैं
बस अर्सा बाते
करते रहते थे।

हाँ वही,
आज उसी अँधेरे से
मेरा रास्ता मुड़ रहा हैं।

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Fictions

किताब और ऐनक

 

 

कभी दादी नानी से कोई कहानी नहीं सुनी थी रचित ने। उसे नहीं पता था रात कैसे गुजर जाती हैं उनकी गोद मे सर रखते ही।

एक रात काम से लौटते हुए गुप्ता जी एक नई गुलज़ार की किताब लेके आए। मेज पर रखी किताब और ऐनक को रचित कोने से घूरता रहा।

उस रात ना वो ऐनक आँखों से उतरी, ना वो पिता के गोद मे सोया रचित।

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