Fictions

अंग्रेज़ी की टीचर

10 मिनट की क्लास बाकी, फिर भी घंटों भर का भार लग रहा था। हर दिन की तरह उस दिन भी रचित को क्लास के खत्म होने का बेसब्री से इंतज़ार था।

“टन-टन-टन” बस किताब बंद की और
गालरी की ओर भाग दिया वो।

“गुड आफ्टर-नून, मिस अनीता।” हर रोज़ की तरह, उस दिन भी अंग्रेज़ी की टीचर ने रचित के बालों को सहला कर स्टाफ रूम को ओर चली गई।

पहला प्यार की तब कुछ ऐसी मुलाकात होती थी।

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Poetry

एकतरफ़ा

इस नींद से
नफरत भी हैं,
उतना ही
इश्क भी|

जो जगा
तो ख्यालों में तुम,
जो सोया
तो ख्वाबों में तुम|

ये एकतरफ़ा
ज़िन्दगी भी हैं,
और एक
कतल सा भी हैं|

तुम हो बस
मेरे ख्यालों के हो,
तुम न हो तो
किसी के भी नहीं|

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