Poetry

जब तेरी मेरी उम्र हो जाएगी|

जब तेरी मेरी उम्र हो जाएगी,
मेरी आँखों पर एक मोटा चश्मा होगा,
चलने को किसी का सहारा लेना होगा,
तू वहीँ कहीं मुस्कुरा रही होगी,
तब तेरी हँसी के सहारे सवेरा जागेगा,
शाम की पलके निचे तुझसे होंगी|

जब तेरी मेरी उम्र हो जाएगी,
मैं झुर्रिओं में ज़िन्दगी को याद करूँगा,
गले को गर्म रखने की दावा लूँगा,
पर तू वहीँ कहीं बैठी होगी,
यादों को खुबसूरत तूने जो बनाया होगा,
तुझे उसका धन्यवाद भी तो करना होगा|

जब तेरी मेरी उम्र हो जाएगी,
मैं तुझे खुद में जिंदा रखूँगा,
मैं तेरे सहारे उम्र सारी काट लूँगा,
पर तू कहीं खुदा के पास होगी,
तेरा मुझे वहीँ से डांटना होगा,
पर मैं खुदा से तेरी खातिर नाराज़ रहूँगा|

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Fictions

Phone Call

1

“There’s nothing wrong with this phone.” He yelled.

“Then, why don’t you call me, son?” The old man walked teary.

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Fictions

पुराना घर

House painted green, Panjim. Goa, India

“ये बेरंग सी दीवारोँ पर नया पेंट करना चाहता था मैं!”

“हाँ!” गीत ने कहा।

“तुम बोली ऐसा ही रहने दो, घर लगता हैं।” रचित ने जवाब दिया।

उम्र बीत गयी, पर यादें वहीँ मिली पुराने घर की चौखट पर।

#छोटीसीकहानी

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