Poetry

कोई आने को हैं।

कुछ बातें भिजवा दो,
कोई ख़्वाब नया आने को हैं।

मुलाकातों के दिन गुजर गए,
कुछ इत्तेफ़ाक़ भिजवा दो,
कोई अफसाना नया होने को हैं।

रात हैं इंतज़ार में तरस रही,
कुछ तन्हाई मिटा दो,
कोई याद अपना आने को हैं।

जाम खाली रखे हैं,
कुछ बातें भिजवा दो,
कोई ख़्याल आने को हैं।

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Poetry

ये भी कोई बात हुई

चाय, सिगरेट और बारिश,
ये तो कोई बात न हुई।
तन्हाई भरी रात और तुम्हारी याद,
ये तो कोई मुलाकात न हुई।

वही गली, शहर, और घर की खिड़की,
वही पनवाड़ी, वही सिगरेट और इंतज़ार,
ये सब ठीक तो नहीं,
ये भी कोई बात हुई,
आए नहीं तुम बारिश को झाँकने खिड़की से,
मिली नहीं तुमसे फ़िर मेरी नज़रे,
ऐसे ही वापस लौट जाना होगा अपने शहर,
ये भी कोई मुलाकात हुई।

चाय, सिगरेट और बारिश,
ये तो कोई बात न हुई।

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अकेलापन मेरा

हाँ, यही तो हैं,
जो कभी नहीं जाता छोड़ कर,
वहीँ आ जाता हैं
जहाँ मैं मुड़ जाता हूँ।

पता नहीं क्या चाहता हैं मुझसे,
बात भी तो नहीं करता कभी,
चुप चाप खामोश
आँखें टिकाये रहता हैं मुझपे।

आते जाते हर वक़्त
सब चले जाते हैं अकेले छोड़ कर,
साया भी मेरा
मुझे अँधेरा होते ही छोड़ जाता हैं।

अब तो जैसे
आदत हो गयी हो इसकी।
न जाने कब से हैं,
मेरे साथ ये अकेलापन मेरा।

मेरा अकेलापन
मुझे अकेला नहीं छोड़ता कभी।

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