Fictions

Phone Call

“Tring Tring…” This was 9th time Rachit called her.

She told him that he could contact her anytime. Furiously, he didn’t bother to call her again.

“Silent Cardiac Arrest” he read on her friend’s facebook status.

Seven days later, he still thought she would pick up his call, and surprise him.

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Fictions

शोर

“अगर चुप ही बैठना हैं तो शोर में क्यों न बैठ जाए?”

“मैं बातों से जेबें भर लाऊंगा अगली बार।” क्लब के ढिंचाक में रचित पास आया, “और फिर ख़ामोशी भी तो थोड़ा बात कर लेगी।”

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Poetry

यहाँ बिकना कितना आसाँ हैं,
कोई नफ़रत खरीद गया,
कोई मोहब्बत बेच गया।

कुछ साँसे क्या ज़हर हुई,
वो खुले में नकाब बेच गया।

साँसे

Aside
Poetry

मोड़

वो मोड़ याद होगा तुम्हें,
वही जहाँ रात भर
नींद यूँही बैठी रहती थी
और तुम और मैं
बस अर्सा बाते
करते रहते थे।

हाँ वही,
आज उसी अँधेरे से
मेरा रास्ता मुड़ रहा हैं।

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Poetry

एकतरफ़ा

इस नींद से
नफरत भी हैं,
उतना ही
इश्क भी|

जो जगा
तो ख्यालों में तुम,
जो सोया
तो ख्वाबों में तुम|

ये एकतरफ़ा
ज़िन्दगी भी हैं,
और एक
कतल सा भी हैं|

तुम हो बस
मेरे ख्यालों के हो,
तुम न हो तो
किसी के भी नहीं|

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Fictions

पनिशमेंट

बठिंडा से 8 बजे की इनर्सिटी जैसे ही दिल्ली के लिए चलने लगी, पाँच साल की कनिका खुशी से अपनी माँ को बताने लगी।

अभी स्टेशन से कुछ दूर ही गई थी ट्रेन, उसने पूछा, “माँ, डैडी कहाँ हैं? माँ! डैडी?”

“वो चले गए ऑफिस। उनको पनिशमेंट मिली हैं न।” गीत ने जवाब दिया। दो दिन पहले, जो मेजर रचित सरहद पर शहीद हुए, वो सजा ही थी उनके परिवार के लिए।

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Poetry

थोड़ा थोड़ा

थोड़ी रात तुम ले आना,
मैं एक चाँद पूरा ले आऊँगा|

थोड़ी सी बातें ले आना तुम,
मैं बस्ता भर रातें ले आऊँगा|

कुछ लव्ज़ दे जाना तुम,
मैं उम्रभर तुम्हें लिखता रहूँगा|

एक पुराना किस्सा ले आना तुम,
मैं अपनी हस्ती मिटा आऊँगा|

थोड़ी याद तुम ले आना,
मैं कुछ आँसूं बहा आऊँगा|

ये थोड़ा थोड़ा कटोरी भर ज़िंदगी,
ये कुछ कुछ पल की रातें|

एक किस्सा, कई रातें,
एक रात, कई किस्से|
आते जाते, कभी थोड़ा तुम,
कभी थोड़ा मैं दे जाऊँगा|

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