Poetry

मोड़

वो मोड़ याद होगा तुम्हें,
वही जहाँ रात भर
नींद यूँही बैठी रहती थी
और तुम और मैं
बस अर्सा बाते
करते रहते थे।

हाँ वही,
आज उसी अँधेरे से
मेरा रास्ता मुड़ रहा हैं।

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Poetry

अकेलापन मेरा

हाँ, यही तो हैं,
जो कभी नहीं जाता छोड़ कर,
वहीँ आ जाता हैं
जहाँ मैं मुड़ जाता हूँ।

पता नहीं क्या चाहता हैं मुझसे,
बात भी तो नहीं करता कभी,
चुप चाप खामोश
आँखें टिकाये रहता हैं मुझपे।

आते जाते हर वक़्त
सब चले जाते हैं अकेले छोड़ कर,
साया भी मेरा
मुझे अँधेरा होते ही छोड़ जाता हैं।

अब तो जैसे
आदत हो गयी हो इसकी।
न जाने कब से हैं,
मेरे साथ ये अकेलापन मेरा।

मेरा अकेलापन
मुझे अकेला नहीं छोड़ता कभी।

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