Poetry

ये भी कोई बात हुई

चाय, सिगरेट और बारिश,
ये तो कोई बात न हुई।
तन्हाई भरी रात और तुम्हारी याद,
ये तो कोई मुलाकात न हुई।

वही गली, शहर, और घर की खिड़की,
वही पनवाड़ी, वही सिगरेट और इंतज़ार,
ये सब ठीक तो नहीं,
ये भी कोई बात हुई,
आए नहीं तुम बारिश को झाँकने खिड़की से,
मिली नहीं तुमसे फ़िर मेरी नज़रे,
ऐसे ही वापस लौट जाना होगा अपने शहर,
ये भी कोई मुलाकात हुई।

चाय, सिगरेट और बारिश,
ये तो कोई बात न हुई।

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Fictions

सिगरेट

बहुत देर तक जब उनकी चुप्पी और मेरी खामोशी बातें कर के थक जाते, तो कबीर चले जाने का इशारा कर देते थे। मैंने कभी रोका नहीं उन्हें। अपना सामान उठाते और बस चले जाते कबीर। ऐशट्रे और उसमे रखी उनकी आधी फूँकी हुई सिगरेटे संभाल लेती थी।

जब भी कोई पूछता ये सिगरेट की आदत कहाँ से लगी, मैं उनकी यादों में फूँकी उनकी आधी रखी सिगरेट गिना देती थी।

सिगरेट को जब मैं अपने लबों पर रखती थी, एक उनके साथ होने का एहसास पा लेती थी। उठते धुएं में उनकी ख़ुशबू रहती थी| अब बस आदतें ही बाकि हैं|

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