Poetry

बिग बैंग

कभी यूँ हुआ हो,
कागज़ों पर छाप देते देते
तुम्हें ख़्याल आये
ये सब मिट जाएगा।

सहर होते ही
ये अँधेरा बिखर जाएगा,
और दूर तारों से
एक बिंदु में सब मिल जाएगा।

वहाँ एक नया दौर हैं,
ज़िन्दगी अलग हैं
ख़्वाब अलग हैं,
इस जहां से अलग जहां और भी हैं।

ख़्याल से लड़ते लड़ते,
ये ज़िन्दगी भी ख़त्म होगी,
लेकिन तुम ये नहीं सोचोंगे,
क्योंकि देखा नहीं ये “बिग बैंग”।

Advertisements
Standard
Poetry

जब तेरी मेरी उम्र हो जाएगी|

जब तेरी मेरी उम्र हो जाएगी,
मेरी आँखों पर एक मोटा चश्मा होगा,
चलने को किसी का सहारा लेना होगा,
तू वहीँ कहीं मुस्कुरा रही होगी,
तब तेरी हँसी के सहारे सवेरा जागेगा,
शाम की पलके निचे तुझसे होंगी|

जब तेरी मेरी उम्र हो जाएगी,
मैं झुर्रिओं में ज़िन्दगी को याद करूँगा,
गले को गर्म रखने की दावा लूँगा,
पर तू वहीँ कहीं बैठी होगी,
यादों को खुबसूरत तूने जो बनाया होगा,
तुझे उसका धन्यवाद भी तो करना होगा|

जब तेरी मेरी उम्र हो जाएगी,
मैं तुझे खुद में जिंदा रखूँगा,
मैं तेरे सहारे उम्र सारी काट लूँगा,
पर तू कहीं खुदा के पास होगी,
तेरा मुझे वहीँ से डांटना होगा,
पर मैं खुदा से तेरी खातिर नाराज़ रहूँगा|

Standard