Poetry

जनता

शोर ना करो,
अरे कोई चिल्लाओ नहीं,
शांत हो जाइए,

वो अभी सो रहे हैं,
आंखें मूंदे सपनों में,
वादों में मेरे।

एक पुल ही तो गिरा हैं,
कोई आफत नहीं आयी,
कुछ घायल,
एक–आद ही तो मरा हैं।

तस्वीरों पर ध्यान ना दो,
लिए माइक हाथ में,
सवाल पूछ लेने दो,
पर मैं जांच बिठा दूंगा।

अब तक नहीं पता चला,
कल भी नहीं पता चलेगा,
हम दो और वादे करेंगे,
वो फिर सो जाएंगे।

श्ह, चुप हो जाओ सब,
कोई शोर ना करे,
वो सब सो रहे हैं।

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Poetry

सुनने वाला कौन हैं यहाँ

कभी लगता हैं
तुम्हें अभी बहुत कुछ कहना हैं,
लेकिन वो सुनने वाला अब यहाँ हैं नहीं।

और अजीब हैं ये,
बातें भी उसके इर्द-गिर्द की हैं,पर
वो सुनने वाला अब यहाँ हैं नहीं।

हाँ, मैं तुम्हारे जाने के बाद,
हर्फ़-दर-हर्फ़ जज़्बात का मोहताज़ हो गया हूँ,
लेकिन तुम सुनने वाली यहाँ हो नहीं।

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Fictions

तीन मंजिला मकान

अभी कुछ महीने ही हुए थे प्रवीण कुमार के गुज़रे, उनके तीन बेटों ने तीन मंजिला मकाँ बेचने का इश्तिहार दे दिया। अब तीनों शादीशुदा थे। तीनों भाई अब अपने अपने परिवार वाले थे और उनकी बीवियों को साथ मे रहना आसाँ नहीं लगता था।

प्रवीण ने बड़ी हसरतों से ये तीन मंजिला मकान बनवाया था। हर बार कहते थे, “मेरे तीनों बेटे एक साथ रहेंगे एक ही घर में।”

इश्तिहार देख कर एक सज्जन, रचित, ने बड़े बेटे से कॉन्टैक्ट किया। मकान पसंद आ गया और कागज़ भी तैयार हो गए। सौदा हो गया, दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर भी हो गए।

अब रचित कहता हैं सब से, “मेरे तीनों बेटे एक साथ रहेंगे एक ही घर में।”

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Poetry

याद तो होगा नहीं तुम्हें।

एक बात तो बताना भूल गया शायद,
अभी वक़्त नहीं हुआ तुम्हारे जाने का।

अरे, तुमने तो सामान भी बाँध लिया,
उस शाम हमने बात ख़त्म तो नहीं की थी।

वादा याद हैं ना तुम्हें या फिर दोहराऊं,
एक तस्वीर साथ की,
एक तोहफ़ा 5 जनवरी का,
एक डायरी मेरे तुम्हारें ज़िक्र मुलाकात की।

हाँ, तुम्हें तो याद ही नहीं होगा कुछ,
आए बड़े, सब याद रखने वाले।

तुम तो कहती थी तुम न जाओगे ऐसे,
उस रात फिर क्या हुआ?
जाओ मैं नहीं करता बात अब तुमसे।
अब जाओ भी, और सुनों
ये यादें तो ले जाओ अपने साथ।

बात तो बताना भूल गया, शीतल,
आदतें नहीं भूल सकता तुम्हारे जाने के बाद।

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