Poetry

सुनने वाला कौन हैं यहाँ

कभी लगता हैं
तुम्हें अभी बहुत कुछ कहना हैं,
लेकिन वो सुनने वाला अब यहाँ हैं नहीं।

और अजीब हैं ये,
बातें भी उसके इर्द-गिर्द की हैं,पर
वो सुनने वाला अब यहाँ हैं नहीं।

हाँ, मैं तुम्हारे जाने के बाद,
हर्फ़-दर-हर्फ़ जज़्बात का मोहताज़ हो गया हूँ,
लेकिन तुम सुनने वाली यहाँ हो नहीं।

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Poetry

कौनसी नई बात हैं।

इस शाम में थकान हैं,
ये तो कोई नई बात नहीं।

गुज़रते हैं काँटों से रास्ते,
खरोंचने को यादेँ क्या खास हैं।

भीड़ में अकेले हैं,
जैसे सितारोँ में एक चाँद हैं।

तुम कहती हो तुम्हें पता हैं,
पर ये भी तो आम बात हैं।

दिल उदास हैं,
ये कौनसी नई बात हैं।

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