Poetry

इश्क़ की इबादत

इसे रहने दो वैसा ही,
जैसा सहर की पहली छाओं,
जैसे चाँद की जलती लौ।

इश्तेहार में चुटकी लेती
नए शहर की बेबसी,
कुचों में इमारतों से झाँकती
बादलों की महकती तस्वीरें।
इसे रहने दो ऐसा ही।

इश्क़ को ऐसा इबादत ही रहने दो,
मज़हब हुआ तो बिक जाएगा।

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Fictions

Phone Call

“Tring Tring…” This was 9th time Rachit called her.

She told him that he could contact her anytime. Furiously, he didn’t bother to call her again.

“Silent Cardiac Arrest” he read on her friend’s facebook status.

Seven days later, he still thought she would pick up his call, and surprise him.

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Poetry

उज़्र-ए-बारिश

वो जो बर्फ के ग्लेशियर होते हैं,
जो एक थपके में टूट गिरते हैं,

वैसा ही कुछ सिने में टूटा हैं,
कोई आग से नहीं पिघला कुछ।

चंद बची घड़ियों में वो गर्म- ठंडी आँहे हैं,
जैसे पिछले सब वहीं ठहरा हुआ हैं।

कोई छू कर भी देख ले असीर-ए-जिस्म,
दरून-ए-जिस्म मैं कांपता मिलता हूँ।

तुम्हें पता कैसे होगा इस सीली हवायों का,
सुना हैं,
अज़ीज़-ए-गुल्फ़ाम में उज़्र-ए-बारिश नहीं होती।

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Fictions

शोर

“अगर चुप ही बैठना हैं तो शोर में क्यों न बैठ जाए?”

“मैं बातों से जेबें भर लाऊंगा अगली बार।” क्लब के ढिंचाक में रचित पास आया, “और फिर ख़ामोशी भी तो थोड़ा बात कर लेगी।”

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Poetry

बिग बैंग

कभी यूँ हुआ हो,
कागज़ों पर छाप देते देते
तुम्हें ख़्याल आये
ये सब मिट जाएगा।

सहर होते ही
ये अँधेरा बिखर जाएगा,
और दूर तारों से
एक बिंदु में सब मिल जाएगा।

वहाँ एक नया दौर हैं,
ज़िन्दगी अलग हैं
ख़्वाब अलग हैं,
इस जहां से अलग जहां और भी हैं।

ख़्याल से लड़ते लड़ते,
ये ज़िन्दगी भी ख़त्म होगी,
लेकिन तुम ये नहीं सोचोंगे,
क्योंकि देखा नहीं ये “बिग बैंग”।

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Poetry

ग़लतफ़हमी

तुम्हें किसने बताया,
अब गुल्फ़ाम ज़िंदा नहीं हैं?

सिने में दर्द हैं,
टूटे दिल को तुमने मौत समझ लिया।

शायर ही बना हूँ,
और मेहख़ाने में अक्सर मिलता हूँ।

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Poetry

Sunkissed

Ohh, my my my,
Look at her,
Kissed all the way,
Like bright and right.

Absorbing everything,
That window could deliver,
Like that Sunkissed,
All right and bright.

Let’s just keep it,
The way it is here.
She being a face,
I being her kiss she awaits.

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