Fictions

अंग्रेज़ी की टीचर

10 मिनट की क्लास बाकी, फिर भी घंटों भर का भार लग रहा था। हर दिन की तरह उस दिन भी रचित को क्लास के खत्म होने का बेसब्री से इंतज़ार था।

“टन-टन-टन” बस किताब बंद की और
गालरी की ओर भाग दिया वो।

“गुड आफ्टर-नून, मिस अनीता।” हर रोज़ की तरह, उस दिन भी अंग्रेज़ी की टीचर ने रचित के बालों को सहला कर स्टाफ रूम को ओर चली गई।

पहला प्यार की तब कुछ ऐसी मुलाकात होती थी।

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अगली शाम

गाड़ी से ऊतर कर, कृशा घर को अपने चल पड़ी।

“फिर कब मिल सकते है?”

“कभी भी, जब वक़्त मिले।” उसने पलट कर आँखों से जवाब दिया, और रचित वही रुक उसे जाते देखता रहा।

खामोशी उस शाम छुट्टी पर थी। कहानी धीरे धीरे ऐसे ही बन जाती हैं।

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Arranged

“Two cold frappes please.” He placed the order, and then back to his seat.

She looked around, he scrolled down.

“So, how does it start?” She asked.

“I don’t know, I am as novice as you are.”

First arranged meeting at Barista couldn’t get enough coy.

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Pressure Cooker

Krisha kept her cigarette unlit between two fingers, and asked, “what is romance to you?”

“Romance… Certainly not bollywood songs, and those Valentine’s Day cards, nope… That’s not romance.” Kritika replied.

“It must be a whistle of the Pressure cooker, Kabir getting away from me, folding clothes, and mundane… I guess that’s Romance.” Kritika said further.

Krisha pulled her close, whispered in her ears, “Romance has better meaning with me.” and nibbled. It must be the pressure cooker that stole the romance that day.

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Daily Prompt: Heal

“No, you are not here to tell the truth.” Disha shouted.

Taking the support of the door, Geet was not able to look into her eyes. All she could see everything cluttered in the room.

“What can you say now? You don’t have to make up stories around the truth.” Disha said with teary eyes. “You destroyed my relationship with Rachit.”

The relationship among two sisters and a man had only one truth. Truth cannot heal relation.

via Heal

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सिगरेट

बहुत देर तक जब उनकी चुप्पी और मेरी खामोशी बातें कर के थक जाते, तो कबीर चले जाने का इशारा कर देते थे। मैंने कभी रोका नहीं उन्हें। अपना सामान उठाते और बस चले जाते कबीर। ऐशट्रे और उसमे रखी उनकी आधी फूँकी हुई सिगरेटे संभाल लेती थी।

जब भी कोई पूछता ये सिगरेट की आदत कहाँ से लगी, मैं उनकी यादों में फूँकी उनकी आधी रखी सिगरेट गिना देती थी।

सिगरेट को जब मैं अपने लबों पर रखती थी, एक उनके साथ होने का एहसास पा लेती थी। उठते धुएं में उनकी ख़ुशबू रहती थी| अब बस आदतें ही बाकि हैं|

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लेट हो जाऊंगा

टिक टिक टिक… घड़ी जब रात के अँधेरे में बात कर रही थी, रचित का टेक्स्ट आया मोबाइल पर।

“मैं लेट हो जाऊंगा। तुम सो जाओ।”

अभी इंतज़ार से थक कर सोने ही लगी थी के दरवाज़े पर दस्तक हुई। पाऊ अपनी ही आहत से डर रहे थे, और जैसे सारा शहर मुझे ही सुनाई दे रहा हो। दरवाज़े से झाँका तो, रचित खड़ा था। फिर उसने अपने ही फ़ोन से कॉल किया, ये अजीब लगा।

“हेल्लो, आप रचित गुप्ता के घर से बोल रही हैं। अभी कुछ देर पहले रिंग रोड पर बाइक का एक्सीडेंट हुआ हैं, आप आ कर यहाँ रचित की बॉडी की शनास्त कर लीजिए।” दूसरी ओर से इंस्पेक्टर ने कहा।

रचित ने वादा भी निभाया आने का, और मैं पूछ भी न सकी उसके सर पर चोट कैसे लगी।

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