Fictions

सिगरेट

बहुत देर तक जब उनकी चुप्पी और मेरी खामोशी बातें कर के थक जाते, तो कबीर चले जाने का इशारा कर देते थे। मैंने कभी रोका नहीं उन्हें। अपना सामान उठाते और बस चले जाते कबीर। ऐशट्रे और उसमे रखी उनकी आधी फूँकी हुई सिगरेटे संभाल लेती थी।

जब भी कोई पूछता ये सिगरेट की आदत कहाँ से लगी, मैं उनकी यादों में फूँकी उनकी आधी रखी सिगरेट गिना देती थी।

सिगरेट को जब मैं अपने लबों पर रखती थी, एक उनके साथ होने का एहसास पा लेती थी। उठते धुएं में उनकी ख़ुशबू रहती थी| अब बस आदतें ही बाकि हैं|

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